दोहा
बंशी धुनि अति मधुर, मन हर लेत मुरारि
चरण कमल में ध्यान धर, मिटे सकल दुख भारी
चौपाई
जय यदुनंदन जय जगदीशा
दीनन के तुम परम अधीशा
मोर मुकुट सिर पीताम्बर सोहे
मधुर मुसक मन सबके मोहे
गोकुल में जब जन्म तुम्हारा
हर्षित भयो जगत संसारा
नंद यशोदा के तुम लाला
सबके मन को लगत निराला
पूतना का उद्धार किया है
शकटासुर संहार किया है
कालिय नाग नाथ कर डारा
भक्तन का तुम कष्ट निवारा
माखन चोरी मन को भाई
गोपी सबने प्रीति बढ़ाई
बंसी की धुन सुनत ब्रजवासी
होत मगन नर नारी दासी
गोवर्धन धरि भक्त उबारे
गोकुल के तुम नाथ हमारे
इंद्र देव का मान घटाया
ब्रज को वर्षा से बचाया
राधा संग रचाई रास
भक्तन के तुम पूरन आस
मथुरा जाकर कंस पछाड़ा
धर्म ध्वजा को ऊंचा गाड़ा
सुदामा के दुख हरने वाले
दीन दयालु कृपा के भाले
द्रौपदी की लाज बचाई
भक्तन की तुम लाज रखाई
गीता ज्ञान सुनाया जग को
मार्ग दिखाया सबके मन को
अर्जुन के सारथी बन आए
धर्म युद्ध में विजय दिलाए
जो कोई कृष्ण नाम गुण गाता
सकल मनोरथ सिद्धि वह पाता
प्रेम सहित जो ध्यान लगावे
जन्म मरण के दुख मिट जावे
कृष्ण कृपा से शांति मिलेगी
भक्ति हृदय में नित्य खिलेगी
राधे कृष्ण कहो मन माहीं
दूजा कोई आसरा नाहीं
दोहा
मोर मुकुट पीताम्बर, अधर धरे मुरली
राधा संग विराजिए, जय जय नंदलाल मुरली
Meaning in brief
A devotional hymn remembering Krishna as guide, protector and beloved friend.
Traditional public-domain devotional text.